सोमवार, 4 जुलाई 2016

संस्कृत पाठशाला

पाठ   १
         
मङ्गलाचरण --- श्लोक

रामो राजमणिः सदा विजयते, रामं रमेशं भजे
रामेणाभिहता निशाचरचमूः, रामाय तस्मै नमः ।
रामात् नास्ति परायणं -- परतरं, रामस्य दासोsस्म्यहम् ।
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे, भो राम! मामुद्धर ।।
अर्थः -- राजाओं मे श्रेष्ठ राम की सदा विजय होती हैं । मैं रमा ( सीता)  के ईश = स्वामी को
भजता हूँ । राम ने राक्षसों की सेना का विनाश किया । उस ( ही)  राम को मैं नमस्कार करता हूँ । राम की अपेक्षा दूसरा कोई भी शरण जाने योग्य नहीं हैं । मैं राम का सेवक हूँ , ( इसलिए)  मेरा चित्त सदैव राम में ही लगा रहे । हे राम !  मेरा उद्धार करें ।
      इस श्लोक में राम ( अकारान्त पुल्लिङ्ग) 
शब्द के सातों विभक्तियों के एकवचन का निरूपण अत्यन्त सुन्दरता से किया गया हैं  ,
साथ ही मङ्गलाचरण भी हुआ हैं । ग्रन्थ के आरम्भ और अन्त में मङ्गलाचरण  करना शास्त्रीय परंपरा हैं ।
                        वाक्यानि
रामः गच्छति = राम जाता हैं ।
सः गच्छति = वह जाता हैं ।
जलं पिबसि = जल पीता हैं ।
त्वं पिबसि = तू पीता हैं  ।
पुस्तकं पठामि = पुस्तक पढ़ता हूँ ।
अहं पठामि = मैं पढ़ता हूँ ।
  (१) सः रामः गच्छति = वह राम जाता हैं ।
        गच्छति सः रामः =  " " " " " " "।

( २) त्वं जलं पिबसि = तू जल पीता हैं ।
       पिबसि त्वं जलं = " " " " " " " ।
( ३) अहं पुस्तकं पठामि = मैं पुस्तक पढ़ता हूँ
     पठामि अहं पुस्तकम् = " " " " " " " "
संस्कृत भाषा में शब्दों को किसी भी क्रम से रखकर वाक्य की रचना की जा सकती है । यही बात उपर्युक्त वाक्यों में दर्शाई गई हैं ।
अहं = मैं          अहं पठामि = मैं पढ़ता हूँ ।
त्वं = तू            त्वं पठसि = तू पढ़ता हैं ।
सः = वह           सः पठति = वह पढ़ता हैं ।
निम्न लिखित वाक्य पढ़िए तथा उनका हिन्दीं
में अर्थ किजिए :--
(१) रामः ग्रामं गच्छति । गच्छति रामः ग्रामम् ।
( २) कृष्णः शुद्धं दुग्धं पिबति ।पिबति शुद्धं दुग्धं कृष्णः ।
( ३) माधवः पुस्तकं शीघ्रं पठति । पुस्तकं शीघ्रं पठति माधवः ।
                   क्रियापदानि
       ( १) गम् ( गच्छ्)  = जाना
गच्छति = ( वह)  जाता है । गच्छसि = ( तू)  जाता है ।गच्छामि = ( मैं)  जाता हूँ ।
              ( २) पा ( पिब्)  = पीना
पिबति = ( वह)  पीता हैं । पिबसि = ( तू)  पीता हैं । पिबामि = ( मैं)  पीता हूँ ।
              ( ३) ( पठ्)  = पढ़ना
पठति = ( वह)  पढ़ता हैं । पठसि = ( तू)  पढ़ता हैं । पठामि = ( मैं ) पढ़ता हूँ ।
               ( ४) दृश् ( पश्य् ) = देखना
पश्यति = ( वह) देखता हैं । पश्यसि = ( तू)  देखता हैं । पश्यामि = ( मैं ) देखता हूँ ।
                  ( ५) क्रीड् = खेलना
क्रीडति = ( वह)  खेलता हैं । क्रीडसि = ( तू)  खेलता हैं ।क्रीडामि = ( मैं)  खेलता हूँ ।
               ( ६) वद् = बोलना
वदति = ( वह)  बोलता हैं । वदसि = ( तू)  बोलता हैं । वदामि = ( मैं)  बोलता हूँ ।
पुल्लिङ्ग                नपुंसकलिङ्ग
१ बालकः = बालक  १ पुस्तकम् = पुस्तक
२ शिक्षकः शिक्षक   २ जलम् = पानी
३ अध्यापकः = अध्यापक ३ दुग्धम् = दूध
४ नृपः = राजा     ४ घृतम् = घी
५ देवः = देव     ५ उद्यानम् = बगीचा
६ मनुष्यः, पुरुषः = मनुष्य ६ पुष्पम् = फूल
७ हस्तः = हाथ   ७ फलम् = फल
८ अलसः = आलसी ८ मधुरम् = मीठा
९ चपलः = चपल    ९ कन्दुकम् = गेंद
१० सूर्यः = सूर्य     १० भोजनम् = भोजन
                      अव्यय
तत्र -- वहाँ । कुत्र -- कहाँ । यत्र -- जहाँ । अत्र --- यहाँ । न -- नही । तदा -- तब । कदा -- कब । यदा -- जब । शीघ्रम्, द्रुतम्, सत्वरम् -- जल्दी । पश्चात् -- बाद में । अपि -
भी । सार्ध,  सह, साकम् -- साथ । एव -- ही
तु, तावत् -- तो । किम् -- क्या ।
                       *
             अभ्यासार्थ प्रश्न
१,  संस्कृत में वाक्य बनाइए : ---
गोविन्द जाता हैं । ---------------------- ।
अशोक जाता हैं । ----------------------- ।
माधव जाता हैं ।------------------------- ।
कमल जाता है ।-------------------------- ।
विनायक जाता हैं ।------------------------ ।
२,  ऊपर के वाक्यों के निम्नानुसार अव्ययों की सहायता से प्रश्नार्थक वाक्य बनाइए :---
कुत्र, कदा ।
३,  रिक्त स्थानों मे सार्थक शब्द भरिए :-----
-------- गच्छामि ।रामः ------- । पत्रं -------
-------- पठति । माधवः -------- पिबति ।
४,  उत्तर दिजिए :----
किं पठसि ?  किं पिबसि ?  किं पश्यसि ?  किं
क्रीडसि ?  किं वदसि ?
५,  जितने बन सकें उतने वाक्य बनाइए :----
अहम्                                   गच्छति
त्वम्              किं, सत्वरम्            करोमि
सः                                          पठसि

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