सोमवार, 20 जून 2016

प्रत्यय ज्ञान।

!!!---: तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग :---!!!

आज हम आपको तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग दिखाते हैं । आप इन्हें समझ लें और दैनिक जीवनमें व्यवहार में प्रयोग अवश्य करें ।
(1.) तुमुन् प्रत्यय का "तुम्" शेष रहता है, अर्थात् उ और न् हट जाते हैं । जैसेः---पठ् तुमुन्--पठितुम्।
(2.) तुमुन् का अर्थ "के लिए" होता है, अर्थात् सम्प्रदान-कारक के स्थान पर इसका प्रयोग होता है ।बालक पढने के लिए विद्यालय जाता हैः---बालकः पठितुं विद्यालयं गच्छति ।
(3.) तुमुन् प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होता है, अर्थात् तुमुन् प्रत्यय से बने शब्दों का रूप नहीं चलता है। यह सदैव एक जैसा बना रहता है, आप चाहें इसे किसी भी लिंग, वचन, विभक्ति या काल मेंप्रयोग कर लें, यह सदैव एक जैसा बना रहेगा ।जैसेः--तुम और मैं पढने के लिए विद्यालय जाते हैंः--त्वं अहं च (आवाम्) पठितुं विद्यालयं गच्छावः ।
(4.) तुमुन् प्रत्ययान्त शब्द दो वाक्यों को मिलाने का काम करते हैंः--
जैसेः---(1.) बालक पढता हैः--बालकः पठति ।
(2.) बालक विद्यालय जाता हैः---बालकः विद्यालयं गच्छति ।
अब इन दोनों वाक्यों को तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग करके मिला देते हैः---बालकः पठितुम् विद्यालयंगच्छति ।
(5.) तुमुन् प्रत्यय वाक्य में प्रथम क्रिया के साथ जुडता हैः---अर्थात् वाक्य में दो क्रियाओं का प्रयोग होगा, उनमें प्रथम क्रिया दूसरी क्रिया के लिए होती है, अर्थात् की जाती है ।इसे "क्रियार्था क्रिया" कहा जाता है । इसका कर्त्ता एक ही होता हैः--जैसेः---बालक खाने के लिए घर जाता हैः--बालकः खादितुम् (भोक्तुम्) गृहं गच्छति (व्रजति) ।इस वाक्य में खादितुम् प्रथम क्रिया है, जिसमें तुमुन् का प्रयोग हुआ है। दूसरी क्रिया गच्छति है, यह क्रिया साधन है, जबकि खादितुम् साध्य है, अर्थात् खाने के उद्देश्य से बालक घर जा रहा है अर्थात् जाना क्रिया इसलिए हो रही है कि वह खाना खाए। अतः गच्छति क्रिया क्रियार्था क्रिया है ।इसे उपपद क्रिया कह सकते हैं। इसके उपपद में रहते ही प्रथम क्रिया के साथ तुमुन् होगा । (इसी अर्थ में ण्वुल् प्रत्यय भी होता है, जैसेः--भोजको व्रजति ।)(तुमुन्ण्वुलौ क्रियायां क्रियार्थायाम्--3.3.10)
(6.) यह भविष्यत् काल में होता है, अर्थात् क्रिया अभी हुई नहीं है, बल्कि की जाएगी, जैसेः---किसान जोतने के लिए खेत पर जाता हैः---कृषकः कर्षितुं क्षेत्रं गच्छति ।यहाँ खेत जोतने की क्रिया भविष्यत् में होगी ।
(7.) जब इच्छा के अर्थ वाली धातुओं का प्रयोग करेंगे, तब भी तुमुन् का प्रयोग होगा । इसमें शर्त यह है कि कर्त्ता एक ही हो, अर्थात् दो क्रियाएँ होंगी, किन्तु कर्त्ता एक ही होगा । इच्छा के अर्थ वाली धातुएँ उपपद में होंगी, अन्तिम क्रिया होगी, तब प्रथम क्रिया में तुमुन् जुडेगा, जैसेः---देवदत्त खाना चाहता हैः---देवदत्तः खादितुम् इच्छति ।(इच्छा की अर्थ वाली ये धातुएँ भी हैंः--कामयते, वाञ्छति, वष्टि) इस उदाहरण में खाना और इच्छा का कर्त्ता देवदत्त एक ही है। इच्छति उपपद में है, तो प्रथम क्रिया खाना के साथ तुमुन् जुड गया ।

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