सोमवार, 30 मई 2016

Download करें द्वितीय संस्कृत फिल्म - ANNADAATAA THE SECOND SANSKRIT SHORT FILM




ANNADAATA A THE SECOND SANSKRIT SHORT FILM https://m.youtube.com/watch?v=wHJxtqCK97U

Download करें प्रथम संस्कृत फिल्म- Putro Rakshati (The First Sanskrit Short Film)


Putro Rakshati (The First Sanskrit Short Film) - YouTube 



Download करें "SamvaadaMalaa - Sanskrit Conversations"


SamvaadaM alaa - Sanskrit Conversations 


मंगलवार, 24 मई 2016

अमेरिका ने नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है...

अमेरिका ने  नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है...
           देवभाषा संस्कृत क वैज्ञानिक पहलू का जानकर अमेरिका चुपचाप नासा की भाषा बनाने की कसरत में जुटा है और भारतीय संस्कृत विद्वानों के मना करने के बाद अमेरिका अपनी नई पीढ़ी को इस भाषा में पारंगत करने में जुट गया है।
                         गत दिनों आगरा दौरे पर आए अरविंद फाउंडेशन [इंडियन कल्चर] पांडिचेरी के निदेशक संपदानंद मिश्रा ने बातचीत में यह रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है, जिसमें सूत्र के रूप में कंप्यूटर के जरिए कोई भी संदेश कम से कम शब्दों में भेजा जा सकता है। विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से उन विद्वानों ने मना कर दिया था।
           इसके बाद कई अन्य वैज्ञानिक पहलू समझते हुए अमेरिका ने वहां नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है। नासा के 'मिशन संस्कृत' की पुष्टि उसकी वेबसाइट भी करती है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि 20 साल से नासा संस्कृत पर काफी पैसा और मेहनत कर चुकी है। साथ ही इसके कंप्यूटर प्रयोग के लिए सर्वश्रेष्ठ भाषा का भी उल्लेख है।

             वैज्ञानिकों का मानना है कि संस्कृत पढ़ने से गणित और विज्ञान की शिक्षा में आसानी होती है, क्योंकि इसके पढ़ने से मन में एकाग्रता आती है। वर्णमाला भी वैज्ञानिक है। इसके उच्चारण मात्र से ही गले का स्वर स्पष्ट होता है। रचनात्मक और कल्पना शक्ति को बढ़ावा मिलता है। स्मरण शक्ति के लिए भी संस्कृत काफी कारगर है। मिश्रा ने बताया कि कॉल सेंटर में कार्य करने वाले युवक-युवती भी संस्कृत का उच्चारण करके अपनी वाणी को शुद्ध कर रहे हैं। न्यूज रीडर, फिल्म और थिएटर के आर्टिस्ट के लिए यह एक उपचार साबित हो रहा है। अमेरिका में संस्कृत को स्पीच थेरेपी के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है।

न्यूजीलैंड के शिक्षकों ने स्वीकारा “संस्कृत से बढ़ती है बच्चों की सीखने की क्षमता”।

न्यूजीलैंड के शिक्षकों ने स्वीकारा संस्कृत से बढ़ती है बच्चों की सीखने की क्षमता
              ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) : प्राचीन काल से ही संस्कृत भाषा भारत की सभ्यता और संस्कृति का सबसे मुख्य भाग रहा है। फिर भी आज हमारे देश में संस्कृत को स्कूली शिक्षा में अनिवार्य करने की बात कहने पर इसका विरोध शुरू हो जाता है। हम भारतवासियों ने अपने देश की गौरवमयी संस्कृत भाषा को महत्व नहीं दिया। आज हमारे देश के विद्यालयों में संस्कृत बहुत कम पढ़ाई और सिखाई जाती है। लेकिन आज अपने मातृभूमि पर उपेक्षा का दंश झेल रही संस्कृत विश्व में एक सम्मानीय भाषा और सीखने के महत्वपूर्ण पड़ाव का दर्जा हासिल कर रही है। जहां भारत के तमाम पब्लिक स्कूलों में फ्रेंच, जर्मन और अन्य विदेशी भाषा सीखने पर ज़ोर दिया जा रहा है वहीं विश्व के बहुत से स्कूल संस्कृत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहे हैं।
             न्यूजीलैंड के एक स्कूल में संसार के विशेषतः भारत की इस महान भाषा को सम्मान मिल रहा है। न्यूजीलैंड के इस स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए संस्कृत पढ़ाई जा रही है। फिकिनो नामक इस स्कूल का कहना है कि संस्कृत से बच्चों में सीखने की क्षमता बहुत बढ़ जाती है। न्यूजीलैंड के शहर आकलैंड के माउंट इडेन इलाके में स्थित इस स्कूल में लड़के और लड़कियां दोनों को शिक्षा दी जाती है। 16 वर्ष तक की उम्र तक यहां बच्चों को शिक्षा दी जाती है ।
           इस स्कूल का कहना है कि इसकी पढ़ाई मानव मूल्यों, मानवता और आदर्शों पर आधारित है। अमेरिका के हिंदू नेता राजन जेड ने पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल करने पर फिकिनो की प्रशंसा की है। फिकिनो में अत्याधुनिक साउंड सिस्टम लगाया गया है। जिससे बच्चों को कुछ भी सीखने में आसानी रहती है। स्कूल के प्रिंसिपल पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि 1997 में स्थापित इस स्कूल में नए तरह के विषय रखे गए हैं। जैसे दिमाग के लिए भोजन, शरीर के लिए भोजन, अध्यात्म के लिए भोजन। इस स्कूल में अंग्रेजी, इतिहास, गणित और प्रकृति के विषयों की भी पढ़ाई कराई जाती है। पीटर क्राम्पटन कहते हैं संस्कृत ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो व्याकरण और उच्चारण के लिए सबसे श्रेष्ठ है। उनके अनुसार संस्कृत के जरिए बच्चों में अच्छी अंग्रेजी सीखने का आधार मिल जाता है। संस्कृत से बच्चों में अच्छी अंग्रेजी बोलने, समझने की क्षमता विकसित होती है।
               पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि दुनिया की कोई भी भाषा सीखने के लिए संस्कृत भाषा आधार का काम करती है। इस स्कूल के बच्चे भी संस्कृत पढ़कर बहुत खुश हैं। इस स्कूल में दो चरणों में शिक्षा दी जाती है। पहले चरण में दस वर्ष की उम्र तक के बच्चे और दूसरे चरण 16 वर्ष की आयु वाले बच्चों को शिक्षा दी जाती है। पीटर क्राम्पटन कहते हैं इस स्कूल में बच्चों को दाखिला दिलाने वाला हर अभिभावक का यह प्रश्न अवश्य होता है कि आप संस्कृत क्यों पढ़ाते हैं? हम उन्हें बताते हैं कि यह भाषा श्रेष्ठ है। संसार की महानतम रचनाएं इसी भाषा में लिखी गई हैं।


अमेरिका के हिंदू नेता राजन जेड ने कहा है कि संस्कृत को सही स्थान दिलाने की आवश्यकता है। एक और तो सम्पूर्ण विश्व में संस्कृत भाषा का महत्त्व बढ़ रहा है, वहीं दूसरी और भारत में संस्कृत भाषा के विस्तार हेतु ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है जिसके कारण भारत में ही संस्कृत का विस्तार नहीं हो पा रहा है और संस्कृत भाषा के महत्त्व से लोग अज्ञान है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध और जैन धर्म के तमाम ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। गांधीजी ने भी कहा था कि बिना संस्कृत सीखे कोई विद्वान नहीं हो सकता।   

रविवार, 15 मई 2016

सामान्य संस्कृत

हरी:ॐ               -           रामराम  (hello)

नमस्कारः          -           नमस्कार  (hi, hello)

सुप्रभातं             -           सुप्रभात  (good morning)

पुनर्मिलामः        -           फिर मिलेंगे  (see you)

शुभरात्रि:            -           शुभरात्री (good night)

श्रीमान्               -            श्रीमान्   (Mr)

क्षम्यतां              -           क्षमा कीजिये (pardon)

चिन्ता मास्तु      -          चिंता नहीं (don't worry)

धन्यवादाः          -          आभार (thanks)

स्वागतं              -           स्वागत हो (welcome)

उत्तमं                -          उत्तम (nice/great)

आगच्छतु           -          आइये (come)

उपविशतु            -           बैठीये (sit)

अपि कुशलम्      -           (सब) कुशल है ? (everyone fine?)

सर्वं कुशलम्       -            सब कुशल है (everyone fine)

क: विशेष:?        -            क्या विशेष ? (something special)

कथयतु              -            कहिये (tell)

चिरात् आगमनम्     -      बहोत दिनों बाद आये (came after long time)

पुनः आगच्छतु         -      फिर आना (come again)

अस्तु, नमस्कारः      -      ठीक है ,नमस्कार (ok, namaskar)

जानामि भो: !           -      पता है रे ! (i know that !)

मा विस्मरतु             -      भूलना मत  (do not forget)

कथम् अस्ति?          -       कैसे हो ? (how are you)

सर्वथा मास्तु            -       बिलकुल नहीं (nowise)

भवतु                       -       ठीक है (ok)

तथापि..                   -       फिर भी (still)

स्मरति खलु?           -       ध्यान में है ना ? (remember ?)

मौनमेव उचितम्      -       चुप रहनाही ठीक (better to be silent)

यथेष्टम् अस्ति        -       भरपूर है (there is enough)

भीति: मास्तु            -       घबराइए मत (do not panic)

अग्रे गच्छतु             -       आगे जाइए (go ahead)

समाप्तम्                -        समाप्त (end)

तदनन्तरं                -       बाद में (after that/this)

भवान् /भवति कुतः आगच्छति? -         आप कहासे आ रहे हो ? (where are you coming from?)

अहं विद्यालयतः आगच्छामि    -          मैं विद्यालय से आरहा हु (i am coming from school)

भवान् कुत्र गच्छति ?                 -          आप कहा जा रहे हो ?(where are you going)

अहं गृहं गच्छामि                       -          मैं घर जा रहा हु (i am going home)

अध्ययनं कथम् प्रचलति ?         -           पढाई कैसी चल रही है? (how is study going?)

सम्यक् प्रचलति                        -           अच्छी चल रही है (going well)

कार्यं कथम् प्रचलति ?                -           काम कैसे चल रहा है?(how is work going?)

यथापूर्वं                                     -           हमेशा की तरह (same as a

सोमवार, 2 मई 2016

उड़ीसा में है संस्कृत विद्वानों का एक गांव ऐसा भी है जिसके हर घर में इस प्राचीन भाषा का एक न एक पंडित मिल जाएगा।

                       संस्कृत भाषा बेशक आम प्रचलन से हट गई हो लेकिन उड़ीसा के तटवर्ती जिले में एक गांव ऐसा भी है जिसके हर घर में इस प्राचीन भाषा का एक न एक जानकार पंडित मिल जाएगा।
                   श्यामसुंदर ग्राम पंचायत के ससना गांव में ज्यादातर ब्राह्मण परिवार रहते हैं। गांव में लगभग ३२ परिवार हैं जिनमें २०० सदस्य हैं। इन सभी परिवारों की विशेषता यह है कि हर परिवार में एक न एक संस्कृत का विद्वान है। ये यहां चल रहे सरकारी संस्कृत माध्यम के शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा देने का काम कर रहे हें।
                     हाल में संस्कृत अध्यापक के पद से अवकाश ग्रहण करने वाले ७६ वर्षीय वैष्णव चरण पति ने कहा कि हमें संस्कृत के संरक्षक होने का गौरव हासिल है। यह प्राचीन भाषा हमारे गांव में पूरी तरह जीवित है। पति ने कहा कि उनके गांव में अगली कई पीढि़यों तक के लिए यह सुनिश्चित कर दिया गया है कि हर परिवार का कम से कम एक बच्चा संस्कृत माध्यम से शिक्षा ग्रहण करेगा।
                  उन्होंने बताया कि संस्कृत माध्यम से शिक्षा पाने वाले ज्यादातर लोगों को सरकारी स्कूलों में रोजगार मिल जाता है अन्यथा वे पंडित का काम करने लगते हैं और हिंदू परिवारों में होने वाले धार्मिक आयोजन संपन्न कराते हैं।
                     ऐसे ही एक व्यक्ति हैं पंडित त्रिलोचन सदंगी। उनके दोनों पुत्र और पुत्रियों ने संस्कृत माध्यम से शिक्षा हासिल की है और वे सरकारी स्कूलों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं। पति ने बताया कि अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर हम इस भाषा को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। अभी तक हमें इसमें काफी सफलता मिली है और हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी भावी पीढि़यां इस परंपरा को जीवित रखेंगी।

                     यह गांव बबकारपुर के पड़ोस में है जिसमें अभिज्ञान शाकुंतलम और ऐसे ही अन्य कई महाकाव्यों के लेखक महाकवि कालिदास की स्मृति में एक छोटा सा मंदिर बना हुआ है। इससे इस क्षेत्र के संस्कृत भाषा के प्रति समर्पण का संकेत मिलता है।