शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

भारत के प्रधानमंत्री नरेँद्र मोदी जी का आयरलैंड में शुद्ध संस्कृत श्लोकों से स्वागत और पिछले ७० वर्षोँ मेँ संस्कृत का अपमान।


                                  भारत के प्रधानमंत्री नरेँद्र मोदी जी ने आयरलैंड में शुद्ध संस्कृत श्लोकों से स्वागत होने पर कहा की अगर ये भारत में होता तो वहाँ का सेकुलरिज्म खतरे में पड़ जाता। इस पर बवाल करते कांग्रेसियों ने कहा की उन्होंने संस्कृत का कभी विरोध नही किया।!
अब ये पढ़िए ध्यान से....
                       १९४९ में मुस्लिम लीग के नज़िरुद्दीन अहमद ने कहा था की संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्ज़ा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा की भारत की संस्कृति और महान ज्ञान, संस्कृत में है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भी उनका समर्थन किया था। लेकिन नेहरू को लगा की संस्कृत को राष्ट्र भाषा का दर्ज़ा देने से हिन्दू धर्म को विशेष महत्व मिलेगा !! और वो नही माना !! पूरा मुस्लिम लीग एकजुट, संस्कृत की पैरवी कर रहा था। क्योंकि १९४९ में वहीँ मुस्लिम भारत में रहे जिन्हें वाकई भारत से प्रेम था। कांग्रेस सरकार की ये घटिया सोच की संस्कृत से हिन्दू अपने गौरवशाली इतिहास को जानेंगे तो समस्या हो जायेगी। जिसकी वजह से हम अपने पूर्वजों के शास्त्रों, शस्त्रों, दर्शन, कानून, अर्थशास्र, औषधि, विज्ञान, गणित - खगोल, ज्योतिष विद्या, वास्तुशिल्प आदि से वंचित रह गए। १९९४ में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा की संस्कृत किसी धर्म की भाषा नही है और इससे भारत की सेकुलरिज्म को कोई खतरा नही। १९९३ में इलाहबाद हाई कोर्ट ने कहा की जिस संस्कृत भाषा को सर विलियम जोन्स ने ग्रीक से ज़्यादा परफेक्ट, लैटिन से ज़्यादा विपुल और किसी भी अन्य भाषा से ज़्यादा विशोधित व् सभ्य माना। उसे अपने ही देश में उचित सम्मान नही और उसके शिक्षकों को अनचाहा संघर्ष करना पड़ता है। २००४ के सुप्रीम कोर्ट ने आर्य गुरुकुल v/s उत्तर प्रदेश सरकार, में कहा की संस्कृत का साहित्य और सामग्री इतनी वृहद और धनी है की ये स्पष्ट होता है की संस्कृत स्वतंत्र वैचारिकों की भाषा थी। एपीजे कलाम सर ने संस्कृत की बढ़ाई करते हुए कहा था की मेरी दिली तमन्ना है की अथर्ववेद की सही शोध और व्याख्या होने पर हम विज्ञान की हर शाखा में नई बुलंदियां छू सकते है। आज भी २१ वीं सदी में विकिपीडिया के डॉ मुजम्मिलुद्दीन कहते है की संस्कृत को बढ़ावा देना चाहिए, विकी को भी और विश्व को भी। वही भारत में, कांग्रेसी शासन में संस्कृत को कोई स्थान नहीँ दिया गया है। जहाँ पहले केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा ५ से संस्कृत अनिवार्य थी, वहीं बाद में जर्मनी और संस्कृत के बीच आप्शन कर दिया !! JNU में ३२ वर्ष के संघर्ष के बाद "संस्कृत सेंटर" खुला।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें