शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

यदि संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाया जाता तो मुख्यतः दो लाभ होते।

                         १९४७ में भारतीय राष्ट्रभाषा के विषय पर बात की गई …. जब पाकिस्तान ने उर्दू को राष्ट्रीय भाषा बनाया था…. उस समय दक्षिण भारत से एक व्यक्ति सामने आया जिसका नाम था अन्ना दुरई एक communist थेजिस कारण ज्यादा जन-आधार नहीं था उनके पासपरन्तु उनके एक वक्तव्य ने उनको इतना जन-आधार दिया की वो पूरे दक्षिण भारत में प्रसिद्ध हो गए….उनकी मांग थी की संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाया जाए….नेहरु ने कहा की संस्कृत is an outdated language”.. अन्ना दुरई ने कहा की कैसे कौन सा ऐसा घर हैं जिसमे गायत्री महामंत्र नहीं बोला जाता.. या कौन सा ऐसा भारतीय है जो ॐ बोलना या उच्चारण न जानता हो”.. परन्तु नेहरु और गाँधी ने उनकी मांग सिरे से नकार दिया और ३०० वर्ष पुरानी भाषा हिंदी पूरे देश पर थोप दी गई। अब यदि संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाया जाता तो मुख्यतः दो लाभ होते। १९४७ में संस्कृत के नाम पर सभी एकजुट थे क्योंकि सभी भाषाएँ संस्कृत से ही बनी हैं।
अब यदि संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाया जाता तो मुख्यतः दो लाभ होते:
१. समस्त भारत से भाषा और प्रांतवाद का मुद्दा ख़त्म हो जाता। संस्कृत के राष्ट्रभाषा होने के कारण आप किसी भी प्रदेश में जाकर सबसे संस्कृत में जुड़ सकते थे। आज की तरह आपको भाषाओँ के कारण कोई समस्या न रहती।
२. यदि संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाया जाता तो समस्त स्कूलों में संस्कृत पढ़ाई जाती और सभी अपने वेदों, उपनिषदों, पुराणों, धर्मग्रन्थों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ जाते...पढ़ पाते...और समझ पाते की सनातन धर्म और अन्य पैशाचिक धर्मो की शिक्षाओं में क्या अंतर है?

                     सनातन धर्म और अन्य धर्मो की शिक्षाओं में क्या क्या भेद हैं? और नेहरु की यही नीति आज सबसे बड़ा जहर बन चुकी है। एक और प्रांतवाद और भाषावाद के नाम पर लोग लड़ रहे हैं दूसरी और.... ९९.९९% मुस्लमान अपने धर्मग्रन्थ उर्दू अरबी फारसी में पढ़ कर सब समझ जाते हैं की उन्हें क्या क्या करना है ?? और ९९.९९% हिन्दू कभी अपने धर्म-ग्रन्थों को छू भी नहीं पाते। मुसलमानों को इतना पता होता है हिन्दू धर्म के बारे में जितना हिन्दुओं को ही पता नहीं होता। एक ५ वर्ष का बच्चा मस्जिद जाता है, उसका बाप लेकर जाता है। एक १० वर्ष का बच्चा उर्दू, अरबी, फारसी में कुरान, हदीश, शूरा आदि सब पढ़ता है। एक १५ वर्ष का बच्चा रमजान के सारे रोजे रखता है। अब ८० वर्ष के कितने सनातन धर्मी होंगे जिन्होंने अपने जीवनकाल में कभी वेदों, का अध्ययन किया हो। आज हिन्दू समाज को महान चिँतन की आवश्यकता है की उनकी आने वाली पीढी का क्या होगा ......। उत्तेष्टि भारत !! वन्दे मातरम !! संघे शक्ति कलयुगे !! भारत माता की जय !! जय जय माँ भारती !! ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

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